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जब पूरा गांव बना स्कूल का सहारा: मांझीगुड़ा में शिक्षा का अनोखा मॉडल

 जब पूरा गांव बना स्कूल का सहारा: मांझीगुड़ा में शिक्षा का अनोखा मॉडल


प्रगतिपत्र वितरण बना जनउत्सव, 90% से अधिक बच्चे ‘A’ ग्रेड में सफल


ग्रामीणों एवं पालकों का उत्साह बढ़ाने, जिला शिक्षा अधिकारी हुए  शामिल।



बस्तर विकासखंड के ग्राम पंचायत तालूर स्थित प्राथमिक शाला मांझीगुड़ा में इस वर्ष प्रगतिपत्र वितरण समारोह ने शिक्षा और समाज के रिश्ते को नई मिसाल दी। जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम के पश्चात प्रगतिपत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि पूरा गांव एकजुट होकर इसमें शामिल हुआ। 200 से अधिक ग्रामीणों की उपस्थिति ने आयोजन को जनउत्सव का रूप दे दिया। बच्चों की सफलता पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से उत्साह व्यक्त किया।

विद्यालय में जनसहयोग से आहाता निर्माण, पालकों का श्रमदान और आर्थिक सहयोग इस स्कूल की पहचान बन चुका है। शिक्षक नारायणलाल साहू के प्रयासों से संचालित रात्रिकालीन कक्षाओं ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को नई ऊंचाई दी है। इसका परिणाम यह रहा कि कक्षा पहली से चौथी तक 90 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थी ‘A’ ग्रेड में सफल रहे।

जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय का निरीक्षण करते हुए किचन गार्डन की सराहना की और इसे बस्तर जिले के लिए आदर्श मॉडल बताया। साथ ही, पालकों की मांग पर आगामी सत्र से पूर्व शाला भवन की मरम्मत कराने की घोषणा की।

कार्यक्रम के दौरान शाला परिवार द्वारा ग्रामीणों एवं पालकों के लिए सामूहिक भोजन की व्यवस्था की गई, जहां अधिकारी और ग्रामीण एक साथ बैठे। यह दृश्य सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक बनकर उभरा।

इस अवसर पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती भारती देवांगन, बीआरसी अजमर कोर्राम, सरपंच कमलोचन कश्यप, उपसरपंच श्रीमती देवकी कश्यप, संकुल समन्वयक तुलसी कश्यप  सुबर्धन कश्यप  सुमेश कश्यप , पिलाशिंग, बलदेव, मुन्ना, किशन, जयदेव, सूर्यपाल, कृष्ण, अनंतराम, दुर्योधन, शंकर, पदम, बालसिंह, पदमन, घसु, मंगलसाय, जगन्नाथ,

कुंजवती, रीता, आसमती, मंग़री कश्यप,  बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक शैलेंद्र तिवारी ने किया।

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