नन्हें वैज्ञानिकों ने बदली सोच की दिशा” — राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर लामकेर में सृजन का उत्सव
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर विकास खंड बस्तर के माध्यमिक शाला लामकेर, संकुल केंद्र लामकेर में ऐसा आयोजन हुआ जिसने यह सिद्ध कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। विद्यालय परिसर में आयोजित विज्ञान मेले ने ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों की जिज्ञासा, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को एक नया मंच प्रदान किया।
विद्यालय के बच्चों ने अपने हाथों से तैयार किए गए वैज्ञानिक मॉडल प्रस्तुत कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। किसी ने सौर ऊर्जा के उपयोग को सरल तरीके से समझाया, तो किसी ने जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा पर आधारित मॉडल से संदेश दिया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि वैज्ञानिक सोच केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होती, बल्कि हर प्रश्न पूछने की आदत, हर समस्या का समाधान खोजने की जिद ही असली विज्ञान है। शिक्षकों ने बच्चों को प्रयोग आधारित शिक्षा अपनाने, जिज्ञासु बनने और नए विचारों को साहसपूर्वक प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
संकुल लामकेर के समन्वयक धर्मेंद्र कुमार अग्रवाणी एवं संकुल सालेमेटा–02 के संकुल समन्वयक संतोष कुमार अग्रवाणी ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी अवसर मिलने पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभा साबित हो सकते हैं। विद्यालय के शिक्षक ईश्वर लाल बंजारे, श्रीमती सोनमनी बघेल, श्रीमती इंदू कुजूर एवं सुश्री संगीता शोरी की सक्रिय भूमिका से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। संचालन सुश्री संगीता शोरी ने प्रभावी ढंग से किया।
यह आयोजन केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के मन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और नवाचार की चिंगारी प्रज्वलित करने का प्रयास था। सच ही है—जब प्रश्न पूछने की आदत विकसित होती है, तभी भविष्य के वैज्ञानिक जन्म लेते हैं।

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