ओजोन क्षरण ozone depletion
ओजोन परत को पृथ्वी का रक्षात्मक कवच सुरक्षात्मक कवच एवं छाता कहते हैं।
ओजोन परत की खोज फैबरी चार्ल्स हेनरी बूसोंन ने 1913 में किया था।
ओजोन परत में छेद सर्वप्रथम फॉर मेन द्वारा अंटार्कटिका में देखा गया।
ओजोन परत समताप मंडल में पाई जाती है।
यहां सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर पृथ्वी के जीव समुदाय को कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करती है।
ओजोन परत में छेद होने का प्रमुख कारण क्लोरीन है क्लोरीन का एक अणु एक लाख ओजोन और वह को तोड़ सकता है।
ओजोन परत की सघनता मापने की इकाई डा ब्सान है।
क्लोरोफ्लोरोकार्बन ओजोन छरण का एक प्रभावी कारण है इसका उत्सर्जन रेफ्रिजरेटर इस पर प्लास्टिक विनिर्माण इत्यादि से होता है।
ओजोन का निर्माण
ऑक्सीजन और वो के सर प्रकाश की पराबैंगनी किरणों के साथ अभिक्रिया से ओजोन का निर्माण होता है।
ओजोन क्षरण के दुष्प्रभाव
इससे पराबैगनी किरणों की तीव्रता बढ़ जाती है जिससे कैंसर रोग होता है।
परा उसने क्यों नहीं पौधों के विकास को प्रभावित करता है।
ओजोन परत में हो रहे छिद्र को रोकने के लिए 1987 में मॉन्ट्रियल समझौता हुआ जिससे यह तय किया गया कि ओजोन परत को हानि पहुंचाने वाले रसायनों के उपयोग में कटौती की जाए।
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