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ग्रीन हाउस प्रभाव /Green House Effect

 ग्रीन हाउस प्रभाव

Green House Effect


1824 ईसवी में जोसेफ फुरियर ने ग्रीन हाउस प्रभाव के अस्तित्व के बारे में पता लगाया था बाद में क्लाउड पाउलेट जान टिंडल आदि ने इसका क्रमश: अध्ययन किया।

ग्रीन हाउस प्रभाव प्राकृतिक प्रक्रिया है।

पृथ्वी का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस है ग्रीन हाउस प्रभाव कार्य न करें तो पृथ्वी का औसत तापमान -18 सेंटीग्रेड हो जाएगा।

ग्रीन हाउस गैस सूर्य से आने वाली लघु विकिरण को तो पृथ्वी पर आने देती है किंतु पृथ्वी से वापस लौटने वाली दीर्घ विकिरण को अवशोषित कर लेती है इस प्रकार पृथ्वी की सतह पर ऊष्मा बनी रहती है।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन सर्वाधिक तीव्रता से ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न कर सकता है किंतु भूमंडलीय उस्मान के लिए सर्वाधिक प्रभावी गैस कार्बन डाइऑक्साइड है क्योंकि ग्रीन हाउस प्रभाव गैसों में इसकी मात्रा सर्वाधिक है। जलवाष्प ग्रीन हाउस गैसों के प्रभाव में वृद्धि करने वाला एक प्रभावशाली कारक है।कार्बन पदार्थ की दहन मोटर गाड़ियों के धुएं औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन इत्यादि से इसकी मात्रा बढ़ती ही है साथ ही वनों की कटाई के कारण सफाई कार्बन और शोषक भी समाप्त हो जाते हैं इस प्रकार कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में वृद्धि हो जाती है।




भूमंडलीय उस्मनका दुष्प्रभाव

  1. समुद्र तल में वृद्धि
  2. समुद्रके तापमान में वृद्धि 
  3. वर्षा के प्रारूप में परिवर्तन
  4. ग्लेशियर का पिघलना
  5. प्रवाल विरंजन


अम्लीय वर्षा:-वर्षा जल में आम लोगों की बड़ी मात्रा या उपस्थिति को अम्ल वर्षा कहते हैं।

ऐसी वर्षा जिस का पीएच मान 5.6 से कम हो अम्ल वर्षा कहलाती है।

वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड नाइट्रोजन के ऑक्साइड क्लोरीन क्लोरीन इत्यादि पदार्थों के मिलने के कारण वर्षा में अमृता की मात्रा बढ़ जाती है जब वर्षा जल का पीएच मान 4 से नीचे आता है तब वह पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अत्यंत हानिकारक हो जाता है।



प्रमुख अम्लीय गैस


  • सल्फर डाइऑक्साइड
  • नाइट्रोजन के ऑक्साइड
  • फ्लोरीन
  • क्लोरीन
  • सल्फर
  • मेथेन
  • कार्बन डाइऑक्साइड 
  • कार्बन मोनोऑक्साइड
  •  फार्मिक अम्ल 
  • अमोनिया

अम्ल वर्षा के दुष्प्रभाव

वनस्पति के क्लोरोफिल पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिससे उनकी प्रकाश संश्लेषण क्रिया बाधित होती है।

मृदा का नाइट्रेट स्तर कम हो जाता है।

अमली वर्षा का भारतीय मृदा पर काम प्रभाव पड़ता है क्योंकि यहां की अधिकांश मृदा छारीय है ।

संगमरमर की इमारतों पर भी अमली वर्षा का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जैसे ताजमहल।

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