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 सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों का जीवन/Life of Indus Valley Civilization


परिवार -मातृसत्तात्मक

शासन व्यवस्था-प्रजातांत्रिक लेकिन केंद्रीय शक्ति से संचालित होती थी।

धार्मिक जीवन- प्रकृति के उपासक या पुजारी प्रमुख इष्ट देव मात्री देवी अन्य देवता पशुपति कुबेर वाला बैल पीपल वृक्ष।


धार्मिक प्रथाएं-जादू टोना बीजों का प्रयोग मूर्ति पूजा आदि का चलन था किंतु मंदिरों का निर्माण नहीं हुआ था पशु बलि प्रथा भी प्रचलित थी भूत प्रेत एवं तंत्र मंत्र में विश्वास होता था पुनर्जन्म में विश्वास किया जाता था।


पशुपालन -हाथी और घोड़े पालने का साक्ष्य प्राप्त नहीं हुए बतख सबसे प्रमुख पक्षी था।


प्रमुख वन्य जीव- हाथी, बाघ, गैंडा,

पालतू पशु- गाय बैल भैंस बकरी भेड़ कुत्ता।

पक्षी -मोर ,तोता, बदक, कबूतर

लिपि-भाव चित्रात्मक लिपि का प्रयोग किया जाता था जो आज तक पढ़ा नहीं जा सका।


सामाजिक जीवन-

 समाज मातृसत्तात्मक शांतिप्रिय लोग थे पुरुष वर्ग दाढ़ी मूछों के शौकीन थे।

आभूषण- कर्न फूल करधनी।


मनोरंजन के साधन-शिकार पशु पक्षी को आपस में लड़ाना पासा खेलना।


आर्थिक जीवन-प्रमुख व्यवसाय कृषि


मकान नियोजन

घर पक्की तो के बने होते थे।

दो मंजिला भवन के साक्ष्य प्राप्त हुए।

घर के बीच में आंगन बना था।

आंगन के चारों ओर कमरे बने हुए थे।

अलग से रसोई वाइस नांगरी बने हुए थे।

मकान का मुख्य द्वार सड़क के पीछे खुलता था।

मकान जाल की तरह बिछा हुआ था।


कला -मूर्ति कला वा चित्र कला का ज्ञान था ।हड़प्पा लिपि चित्रात्मक थी जिसे अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है 2000 मोहरे मिली है जो सेलखड़ी की है एवं आदिकाल चौकोर है।

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