धर्मेश दास महंत

हमारे नायक
सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ की राजगीत "अरपा पैरी के धार" के वायरल वीडियों से छत्तीसगढ़ के हजारों लोगों को अपने मधुर आवाज का दीवाना बनाने वाले दिव्यांग छात्र धर्मेश
नाम - धर्मेश दास महंत
कक्षा - 5 वीं
दिव्यांगता का प्रकार - दृष्टिबाधित
संस्था - दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय सक्ती
विकासखण्ड - सक्ती, जिला - जांजगीर - चांपा (छत्तीसगढ़)
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आज हम आपको हमारे एक ऐसे नन्हें नायक धर्मेश दास महंत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनकी मधुर गीत सुनकर कोई भी मंत्रमुग्ध हो सकता है | धर्मेश जांजगीर - चांपा जिले के विकासखण्ड सक्ती के ग्राम जाजंग के निवासी है | धर्मेश जन्म से ही दृष्टिबाधित है | इसके बावजूद वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी है | इनके माता - पिता मजदूरी का कार्य करके अपने परिवार का भरण - पोषण करते हैं | धर्मेश के माता - पिता धर्मेश की पढ़ाई को लेकर काफी चितिंत थे, क्योंकि दृष्टिबाधित होने की वजह से इनका सामान्य बच्चों के विद्यालय में पढ़ना बहुत मुश्किल हो रहा था |
तभी कहीं से इनके पिता श्री खिलावन दास महंत को सक्ती में संचालित दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय की जानकारी मिली, तो इन्हें उम्मीद की एक नई किरण दिखायी दी | उन्होंने इस विद्यालय के बारे में पूरी जानकारी पता की और वहाँ जाकर संस्था के संचालक व संस्थापक श्री जसवंत कुमार आदिले से भेंटकर, धर्मेश के दाखिले के की बात कहीं, तो यह सुनकर श्री आदिले ने हंसकर कहा कि मैंने धर्मेश जैसे बच्चों के लिए ही यह विद्यालय खोला है | हमारी इस संस्था में धर्मेश का स्वागत है |
आपको बता दे कि श्री आदिले जी भी स्वयं दृष्टिबाधित है और इस विद्यालय के एक कुशल संगीत शिक्षक है | श्री आदिले जी ने अपनी पढ़ाई पूरी करने में नाना प्रकार की कठिनाइयों का सामना किया है, इसलिए उन्हें ऐसे बच्चों के दर्द का भली-भांति ऐहसास है | इसी लिए उन्होंने अपने जैसे दृष्टिबाधित बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए इस संस्था का शुभारंभ किया है | इस संस्था में दाखिले के पश्चात् धर्मेश के सपनों को एक नई उड़ान मिली |
ब्लॉग लेखक गौतम शर्मा से चर्चा के दौरान धर्मेश ने बताया कि शुरू - शुरू में उनका मन इस संस्था में नहीं लगता था, क्योंकि यहाँ का माहौल उनके लिए एकदम अनजाना था | अपने माता - पिता के सहारे के बिना चलने की आदत भी उन्हें नहीं थी | अनजान लोगों के बीच स्वयं को पाकर धर्मेश घबरा - सा गये थे, इसलिए वो बार - बार यहाँ से अपने घर वापस जाने की जिद करते थे | धीरे - धीरे धर्मेश यहाँ के माहौल में ढल गये और अब तो ये हाल है कि वे छुट्टियों में भी घर जाने का नाम नहीं लेते हैं | इस संस्था में बच्चों को ब्रेललिपि पद्धति से अध्यापन कराया जाता है | साथ ही संस्था के संस्थापक और संगीत शिक्षक श्री आदिले जी के द्वारा बच्चों को संगीत एवं अन्य विधाओं में पारंगत भी किया जाता है | धर्मेश का बचपन से ही संगीत और खेलकूद में विशेष रूचि रहा है | इनका संगीत विधा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना है | उनके इस सपने को पूरा करने में यह संस्था पूरा सहयोग कर रहा है | वर्तमान में धर्मेश पढ़ाई के साथ - साथ संगीत विधा की दीक्षा भी श्री आदिले जी से ले रहे हैं | धर्मेश दृष्टिबाधित विशेष विद्यालय सक्ती के बैनर तले कई बड़े कार्यक्रमों में अपने सुमधुर ध्वनि में छत्तीसगढ़ी राजभाषा में मनमोहक प्रस्तुति देकर हजारों लोगों का दिल जीत चुके हैं |
धर्मेश कहते हैं कि - " संगीत एक ऐसी विधा है, जिसे सुनकर मनुष्य ही नहीं ,पशु - पक्षी भी मंत्रमुग्ध हो जाते हैं |"
हाल ही में विभिन्न सोशल मीडिया में धर्मेश द्वारा गाए गये छत्तीसगढ़ की राजगीत "अरपा पैरी के धार" के वायरल वीडियों ने हजारों लोगों को इनके आवाज का दीवाना बना दिया है | इस वायरल वीडियों से ही आज इन्हें "पढ़ई तुंहर दुआर" कार्यक्रम के हमारे नायक के रूप में पहचान मिली है |
ब्लॉग लेखक - गौतम कुमार शर्मा, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला झारपारा (पम्पापुर), विकासखण्ड - रामानुजनगर, जिला - सूरजपुर (छत्तीसगढ़
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